सबसे पहले तो आप सभी का “चलते-चलते” ब्लॉग पर स्वागत है। अब आपके ज़ेहन में एक सवाल उठ रहा होगा कि आख़िर इस ब्लॉग का नाम “चलते-चलते” ही क्यों?
इसके दो कारण हैं -
धन्यवाद!
फिर मिलेंगे ‘चलते-चलते’
इसके दो कारण हैं -
- पहला -- कई दफ़ा ऐसा होता है कि आप कहीं की यात्रा पर होते हैं या फिर किसी से कम समय में जल्दी-जल्दी अपनी बात पूरी करते हैं, लेकिन इस मर्तबाँ कुछ ऐसी घटनाएँ घटित होती हैं या कोई ऐसी बात हो जाती है जो आपके ज़ेहन में कई दिनों तक घूमती है।
- दूसरा -- आज की भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में आपके और मेरे पास महंगी घड़ी तो है, लेकिन न आपके पास समय है और न ही मेरे पास। हालाँकि कुछ आपको भी कहना है और मुझे सुनना है और कभी मुझे कहना है आपको सुनना है। इंसान हैं तो बात-चीत तो होगी ही, बस कमी है तो समय की।
धन्यवाद!
फिर मिलेंगे ‘चलते-चलते’

ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है.
जवाब देंहटाएंशुक्रिया
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