बुधवार, 13 जनवरी 2016

पलक की गिरफ़्तारी और कठघरे में खड़े हास्य कलाकार

क्या अब इस देश में कॉमेडी करना, किसी की नक़ल उतारना, किसी से मजा़क करना भी गुनाह होता जा रहा है? क्या इससे पहले किसी हास्य कलाकार ने किसी बाबा, किसी अभिनेता या नेता की नक़ल नहीं की ? यह सवाल सिर्फ़ मेरे ही ज़ेहन में नहीं, बल्कि देश के तमाम लोगों के ज़ेहन में तब से उठ रहे हैं जब से 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' की पलक उर्फ़ कीकू शारदा की गिरफ़्तारी हुई है।


बाबाओं से अभी तक तो केवल आम जनता ही परेशान थी, लेकिन पलक की गिरफ़्तारी इस बात की ओर संकेत करती है कि बाबा लोग केवल लोगों को चूना ही नहीं लगा सकते, बल्कि किसी को जेल भी भिजवा सकते हैं, चाहे वह कोई हास्य कलाकार ही क्यों न हो। हैरानी वाली बात तो यह है कि हास्य कलाकार द्वारा माफ़ी मांगने के बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया, जबकि उसे माफ़ी नहीं मांगनी चाहिए, क्योंकि हास्य कलाकार ही जब मांफ़ी मांगने लगेगा तो फिर बच ही क्या जाएगा? यदि कीकू की गिरफ़्तारी जायज़ है तो फिर तमाम एफ़एम चैनल के आरजे (रिडियो जॉकी, एंकर) को भी अरेस्ट किया जाए, क्योंकि उनसे ज़्यादा भद्दा मज़ाक शायद ही कोई करता होगा। कॉमेडी फ़िल्मों पर, तमाम कॉमेडी शोज पर भी रोक लगाई जाए, धारावाहिकों पर भी रोक लगाई जाए, क्योंकि उसमें भी कभी सास की छवि, तो कभी बहू की छवि को नकारात्मक रूप में दिखाया जाता है।

आज के लिए इतना ही
फिर मिलेंगे चलते-चलते!

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