मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

पहली नौकरी और पहला प्यार


ये दोनों ज़िन्दगी के ऐसे पड़ाव हैं जिससे हर एक इंसान को गुज़रना पड़ता है। आपको भी गुज़रना पड़ा ही होगा। इन दोनों को अगर जुड़वा भाई भी कहा जाए तो शायद ग़लत नहीं होगा, क्योंकि दोनों में काफ़ी समानताएँ हैं जो इन्हें आपस में जोड़ती हैं। हालाँकि कभी दरार आने के बाद आप चाहकर भी इन दोनों को आजीवन भूल नहीं पाते हैं।

नोट- दरार का आना तय है, मायूस न हो!

आपकी पहली नौकरी हो या पहला प्यार, इन दोनों से आपको बेहद ही प्यार होता है या यूँ कहें तो बहुत ही लगाव होता है। प्यार की स्थिति में आप हर वक़्त एक झलक पाने मात्र को बेकरार रहते हैं और नौकरी की स्थिति में रोज़ कुछ नया करके बॉस को ख़ुश रखने की जुगत में लगे रहते हैं। आप किसी भी क़ीमत पर इन दोनों को खोना नहीं चाहते और आपकी कोशिश हर-समय अपना शत्-प्रतिशत देने की होती है। आप हर वक़्त यही सोचते रहते हैं कि एक ओर आपके दफ़्तर वाले ख़ुश रहे और दूसरी ओर आपकी मेहबूबा भी किसी बात को लेकर नाराज़ न हो। आपको भी कभी-न-कभी इसका आभास तो हुआ ही होगा और यदि नहीं हुआ होगा तो आगे हो जाएगा, परेशान होने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है।


बात वहाँ तक ठीक-ठाक रहती है जब तक आप उन्हें ख़ुश रखने के हर-संभव प्रयास करते हैं, बाबू, बेबी, सोना-मोना, डार्लिंग आदि से संबोधित करते हैं, तीनों समय पूछते हैं कि मेरा बाबू खाना खाया की नहीं, भले ही आपके पेट में हाथी सुसाइड कर रहे हों, लेकिन बाबू को तो पूछना ही पड़ेगा। स्थिति तब विपरीत हो जाती है जब आप किसी एक की बात को किसी दिन नकार देते हैं।
जैसे - भले ही आप रोज़ अपने पहले प्यार के साथ किसी रेस्टोरेंट, किसी होटल या कहीं भी उसके कहने मात्र पर मूड न होने के बावजूद भी चलने को तैयार हो जाते हैं, उसके मुँह लटकाने मात्र पर आप पिज्ज़ा ऑर्डर कर देते हैं, मैडम के साथ नाक-मुँह दबाकर गोलगप्पे खाते हैं, टेबलेट खाकर काम करते हैं, ओवर टाइम (विदआउट...) भी करते हैं, अपना सर्वश्रेष्ठ देने के चक्कर में घड़ी हाथ पर बँधी होने के बाद भी कभी नज़र नहीं डालते हैं, (ख़ासकर ऑफ़िस से वापस आते समय)। हालाँकि जाते समय तो नज़र का रहना बेहद ही ज़रूरी है, नहीं तो क्वार्टर लग जाएगा। घर-परिवार से सप्ताह में एक बार बात करते हैं, वह भी तब डिजिटल इंडिया की बात हो रही है, जब आपके पास वॉट्सऍप, फ़ेसबुक, हैंगआउट, स्काईप, इत्यादि से वीडियो कॉलिंग करने की सुविधा से लैस स्मार्टफ़ोन हो। लेकिन जैसे भी आपने इन सब शुभ कार्यों से इतर अपने लिए 24 घण्टे टिक-टिक करती उस घड़ी पर नज़र डालते हैं जो आपकी कलाई पर बँधी है, तो भाई साहब आप गए काम से।
अब बारी आती है किसी एक से बिछड़ने की या दूसरे शब्दों में उससे कहीं दूर जाने की। यह स्थिति सबसे भयावह और ख़तरनाक होती है, क्योंकि इस समय इन दोनों को पाने के लिए आप अर्श से फर्श पर भी आना पसंद करते हैं और चाहकर भी ज़िन्दगी भर दोनों को भूल नहीं पाते। यदि आप ग़ौर से देखें तो इन दोनों के चक्कर में ही आपकी ज़िन्दगी गुज़र जाती है। आधा जीवन प्यार और आधा जीवन नौकरी। आज के लिए इतना ही...............


फिर मिलेंगे चलते-चलते

9 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
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    2. अपना क़ीमती सुझाव देने के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया

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  2. bahot achha likha bhaiya aapne... pahli job to mil hi jati hai magar pahli mohabbat v mil jaate ho sayad ye sambhav nhi. bt jo bhi ho....apko apna pyar aur sirf pahla job hi nhi..har o job mile jo aap chahe... ye ishwar se prathna rahegi.

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